Blueprint kise kahte hai? – ब्लू प्रिंट कैसे बनाते है?

Blueprint अर्थात हिन्दी मे नील पत्र आधुकनिकता के युग मे हमे हर रोज़ बहुत सारे नये शब्द सुनने को मिलते है। और एक उत्सुकता बन जाती है की, आखिर ये है क्या?

ठीक ऐसे ही एक शब्द आप ने सुना होगा “ब्लू प्रिंट” और आपके मन मे ये ज़रूर सवाल आया होगा की ये Blueprint kise kahte hai? आज Hindi Option के इस ब्लॉग पोस्ट मे उसी के बारे मे जानने की कोशिश करते है।

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ब्लू प्रिंट क्या होता है?- What is Blueprint? in Hindi

यह शब्द आप ने अनेक बार सुना होगा आज हम इसी के विषय मे विस्तार से जानेंगे।

ब्लू प्रिंट की व्याख्या – Blueprint definition in Hindi

आपने देखा होगा की किसी भी विशेष कार्य को साकार करने से पहले उसे किसी कागज़ या सामग्री पर कच्चे स्वरूप मे रचना की जाती है। मतलब किसी काम को सुचारु रूप से करने के लिए उसका आपने दिमाग मे जो योजनाबध्द खाका तयार होता है, और उसे कागज़ पर या किसी वस्तु पर अंकित किया जाता है उसे ही ब्लू प्रिंट कहा जाता है।

ब्लू प्रिंट के मुख्य पहलू -Blueprint Main Wrist in Hindi

ब्लू प्रिंट मे विषय की रचनात्मकता प्रदर्शित होती है, अर्थात लघु या विशाल कार्य को बनाने के लिए उसकी छोटी प्रतिकृती बनाइ जाती है। वास्तव मे कार्य कितना भी विशाल हो ब्लू प्रिंट मे उसकी प्रत्यक्ष झलक दिखती है, जिसका पालण करके बाद मे कार्य संपन्न किया जाता है। Blueprint को संपादित करना आसान होता है, इसलिए इसको अंतिम रूप देने के बाद ही कार्य को साकार करने के लिए उपयोग मे लिया जाता है। ताकी बाद मे कोई हेराफेरी ना करना पडे, बड़ा नुकसान ना हो और पछताना ना पड़े।

ब्लू प्रिंट का निर्माण कैसे होता है ?

किसी भी कार्य को सरल और सहज बनाने के लिए ब्लू प्रिंट बनाया जाता है। विषय अनुसार हर ब्लू प्रिंट के आपने अलग मानक बिंदु होते है। जैसे नक्शा, चित्र, निशान, मसूदा इत्यादि। इन सब को मिलकर ब्लू प्रिंट बनाई जाती है।

उदहारण :

उदाहरण के लिए हम स्कूल के प्रश्न पत्र का निर्माण कैसे होता है इस पर जानकारी लेंगे।

स्कूल के प्रश्न पत्र को निर्माण करते समय पाठ्यक्रम का सम्पूर्ण समावेश इस पत्र में होना चाहिए इस बात का ध्यान रखा जाता है। ताकि विद्यार्थी कुछ अंदाजा लगाकर परीक्षा के लिए उपयुक्त अध्याय की ही पढाई ना करे! इससे उनका ज्ञान सिमित रह जाएगा।

इसी के साथ विद्यार्थियों की बुद्धि की उचित जाँच हो इसलिए वस्तुनिष्ट प्रश्न, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आदि विविध प्रकार से समाविष्ट करते है।

और फिर छपाई से पहले उस ब्लू प्रिंट को ठीक तरह से बार-बार जाँच लिया जाता है। ताकि उसमे कोई त्रुटि बाकी ना रहे।

ब्लू प्रिंट कैसे बनाया जाता है? – How to make Blueprinte in Hindi

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जैसे किसी परीक्षा की गुण पत्रिका Marksheet १०० बच्चों के लिए बनायी गयी है, और भले ही सभी बच्चों को अलग-अलग मार्क्स मिले हो लेकिन सभी की गुण पत्रिका देखने मे एक जैसी होगी, जिसमे बाद मे मार्क लिखे जाते है, तो हम इस गुण पत्रिका के प्राथमिक रूप को ही ब्लू प्रिंट कह सकते है।

और एक उदाहरण: किसी बिल्डर को बिल्डिंग बनानी है तो पहले वो इंजीनियर के पास जाएगा, और आपने पास उपलब्ध जगह का आकार तथा बिल्डिंग मे अपेक्षित सुविधाओं की जानकारी देगा। तो इंजीनियर कौशल लगाकर एक नक्शा तयार करके देगा।

जिस मे Bedroom, Kitchen, Parking, Garden इत्यादि रचनात्मक तरीके से दिखाये जायेंगे।  उसी नक्शे को हम ब्लू प्रिंट कह सकते है। ब्लू प्रिंट को हम समान अर्थी शब्द देना चाहे तो उसे प्रारूप या रूपरेखा कहना  ज्यादा उचित होगा।

ब्लूप्रिंट की आवश्यकता क्यों है? Why Blueprint is needed in Hindi

किसी बडे कार्य को करने के लिए लागत, सामग्री और समय व्यर्थ ना हो इसलिए उसकी नमुना कॉपी अर्थात ब्लू प्रिंट बनाया जाता है। ताकि उसमें मनुष्य द्रारा होने नाली गलतियों को सुधारा जा सके।

ब्लूप्रिंट बनाने से कल्पना करने वाले और उस कल्पना को साकार करवे के लिए प्रत्यक्ष काम करने वाले इनमें समन्वय होता है। इससे कल्पना को मुर्त रूप देने में आसानी होती है।

ब्लूप्रिंट की. निर्माण से कार्य को करने के लिए लगनेवाली सामग्री, मनुष्य बल और समय इसका अंदाजा पहले ही लगता है।

ब्लू प्रिंट कैसे बनाते है? – How to make Blueprint? in Hindi

अब हम देखेंग की Blueprint kaise banate hai?

ब्लूप्रिट बनाने के लिए सबसे पहले विषय अनुसार आवश्यक जानकारी को जुटाना होता है। यह जानकारी शद्ब, अंक, चित्र या दिमागी कल्पना या किसी भौतिक सामग्री के रूप मे भी हो सकती है। किस विषय की ब्लूप्रिट बनाना है उसपर सब निर्भर करता है।

हम स्कूल के परिक्षा के लिए प्रश्न पत्र की ब्लूप्रिट का उदाहरण लेकर समझते है की ब्लू प्रिंट कैसे बनाते है?

प्रशन पत्रीका बनाने के लिए सबसे पहले…

  • विषय चुनना होता है जैसे गणित, इतिहास, विज्ञान आदी
  • उस विषय के पाठ को ध्यान में रखकर प्रश्नों की संख्या निश्चित करना
  • प्रश्नों की संख्या को प्रश्नों के टाइप्स में विभाजीत करना जैसे एक लाइन मे उत्तर, विस्तारीत उत्तर, गलत सही जवाब, वस्तुनिष्ठ प्रश्न, निबंधात्मक प्रश्न आदि
  • इसके बाद निश्चित किए गये कुल मार्क का प्रश्नों की कठिनता या टाइप्स और संख्या अनुसार विभाजन
  • इस सभी तयारी के बाद एक  पेज पर इन सबके आधार पर एक प्रश्न पत्रीका का नमुना तयार किया जाता है। जो बहुत सारे बदलाव योग्य होता है।
  • और अंत में विषय से जुडे सभी परीक्षको के निरिक्षण के बाद उस नमुने को पक्का किया जाता है जिसे हम ब्लू प्रिंट ट कह सकते है।

जैसे हमने पहले भी स्पष्ट किया है की ब्लू प्रिंट को निले कलर या कागज पर हि छपवाना आवश्यक नही होता। वह नाम तो प्रारंभिक इतिहास से पडा है।

ब्लू प्रिंट का इतिहास-History of Blueprint in Hindi

कहते है की Blueprint का जन्म  1842 मे हुआ था। उसे सर जॉन हार्षल नामक व्यक्ति ने एक नीले रंग के पृष्ठ भुमी पर सफेद रेखाओं से पहली बार ब्लू प्रिंट बनायी थी। इसीलिए उस ख़ाके की दिमागी उपज को ब्लू प्रिंट कहा गया।

समय के चलते बाद मे इसका विस्तार हुआ और किसी भी कच्चे योजना प्रारूप को ब्लू प्रिंट कहा जाने लगा। लेकिन वर्तमान मे इस शब्द का उपयोग बहुत कम दिखता है। पढ़ाई करनेवाले इंजीनियर , आर्किटेक्ट या आयोजक उसे अब केवल नक्शा, चीत्र या प्रिंट कहकर संबोधित करते है।

इसीलिए अगर कोई ब्लू प्रिंट शब्द का उच्चारण करता है तो हम आश्चर्य मे पड जाते है, की ये होता क्या है?

ब्लू प्रिंट पर एक वीडियो :

तो आशा करता हूँ की Hindi Option की Blueprint kise kahte hai? यह पोस्ट आपको ज़रूर पसंद आयी होगी। आप अपनी रे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखना।  पोस्ट को ध्यान से पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद!

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1 Comment

Balram Bomanwad

मैं बलराम बोमनवाड आप को प्रणाम करता हूँ। मुझे ख़ुशी है की आप ने आप की खोज से संबंधित सामग्री ढूंढ़ने के लिए मेरी वेबसाइट का चयन किया है। मुझे आशा है की आप बिलकुल निराश नहीं होंगे आप के प्रश्न और समस्या का समाधान करना ही मेरे इस वेबसाइट का उद्देश्य है। और मुझे भरोसा है की आप अपनी खोज के लिए बार-बार मेरे साइट पर आएंगे। अपनी अनमोल राय कमेंट बॉक्स में लिखे। आप का दिल से धन्यवाद !
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